Monday, June 8, 2020

बादल दानी,बादल दानी




चम चम चमकी बिजली रानी,
उठी गगन में घटा सुहानी,
बादल दानी,बादल दानी,
खूब झम झम बरसो पानी ।

प्यासी चिडिया ,प्यासी गैया,
खाली है सब ताल-तलैया,
सूखे घाट पडी है नैया,
हुई मछलियों को हैरानी,
बादल दानी,बादल दानी ।

सागर से भर-भर जल लाते,
गांव-गांव में रस बरसाते
सब जीवों की प्यास बुझाते,
धरती हो जाती है धानी,
बादल दानी,बादल दानी ।

फसल धान की खेतों महके,
राह घाट हरियाली लहके,
मन किसान का गाए चहके,
देखदेख मेंढों तक पानी,
बादल दानी,बादल दानी ,
खूब झमझम बरसो पानी


बाबूलाल शर्मा
कवि
बाबूलाल शर्मा "प्रेम"

* കവിത നോട്ട് ബുക്കിൽ എഴുതുക. കവിതയുടെ സന്ദർഭം മനസ്സിലാക്കി ആസ്വദിച്ച് ചൊല്ലുക...... *

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