चम चम चमकी बिजली रानी,
उठी गगन में घटा सुहानी,
बादल दानी,बादल दानी,
खूब झम झम बरसो पानी ।
प्यासी चिडिया ,प्यासी गैया,
खाली है सब ताल-तलैया,
सूखे घाट पडी है नैया,
हुई मछलियों को हैरानी,
बादल दानी,बादल दानी ।
सागर से भर-भर जल लाते,
गांव-गांव में रस बरसाते
सब जीवों की प्यास बुझाते,
धरती हो जाती है धानी,
बादल दानी,बादल दानी ।
फसल धान की खेतों महके,
राह घाट हरियाली लहके,
मन किसान का गाए चहके,
देखदेख मेंढों तक पानी,
बादल दानी,बादल दानी ,
खूब झमझम बरसो पानी।


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